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Wednesday, February 24, 2010

अमेरिका, पाकिस्तान और आतंकवाद

कहीं ऐसा तो नहीं कि पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका भी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई पर हमें गुमराह कर रहा है! मैं चाहूंगा कि मेरी वह आशंका गलत साबित हो, लेकिन कुछ तथ्य इसके खिलाफ चुगली कर रहे हैं। अमेरिका ने अपने ऊपर 9/11 के हमले के बाद एक दूरगामी रणनीति के तहत अफगानिस्तान और इराक पर हमले कर उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया। ईरान को निशाने पर रख छोड़ा है। शंकारूपी धागों के उलझाव के बीच यह तथ्य चिन्हित हुआ कि 9/11 के बाद वहां और कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। क्यों? हकीकत तो यह भी है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकियों के खिलाफ अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता आ रहा है। अमेरिकी शासन की ओर से अनेक बार आधिकारिक घोषणा की जा चुकी है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र है। अमेरिका यह भी कहता आया है कि भारत में आतंकवादी गतिविधियों के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। भारत की मुंबई पर 26/11 को हुए कुख्यात आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होना प्रमाणित हो चुका है। अब आइए आलोच्य आशंका पर।
न केवल 26/11 बल्कि उसके आगे-पीछे और अब पुणे विस्फोट का मास्टर माइंड डेविड हेडली अमेरिकी शासन की गिरफ्त में है। हमारी जांच एजेंसियां उससे पूछताछ करना चाहती हैं। मांग यह भी उठी कि अमेरिका हेडली को हमें सौंप दे। सौंपने की बात तो दूर, अमेरिका ने हेडली से पूछताछ की इजाजत भी हमारी जांच एजेंसियों को नहीं दी। आश्चर्यजनक रूप से इस बिंदु पर अमेरिका का रुख बिल्कुल पाकिस्तान की तरह रहा है। 1992-93 के मुंबई शृंृखला बम विस्फोट के मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम व उसके सहयोगी पाकिस्तान में खुलेआम विचरते रहे, सरकार ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 26/11 की घटना को अंजाम देने वालों के संरक्षक पाकिस्तान में बेखौफ घूम रहे हैं। कुछेक गिरफ्तार तो किए गए किन्तु उनके खिलाफ गंभीर अदालती कार्रवाई नहीं हो रही है। एक खूंखार आतंकी को तत्काल जमानत भी मिल गई! हेडली से पूछताछ संबंधी भारतीय अनुरोध को ठुकराकर कहीं अमेरिका आतंक के अपराधियों को किन्हीं अज्ञात कारणों से संरक्षण तो नहीं दे रहा? क्या कारण हो सकते हैं? यह शोध का एक स्वतंत्र विषय है। बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं। किन्तु संदेहों के निवारण की अनिवार्यता को चुनौती भी तो नहीं दी जा सकती! भारत के खिलाफ आतंकियों को दूध पिलाकर पाकिस्तान ने वस्तुत: अपने लिए भस्मासुर पैदा कर लिए। हालत यह है कि पाकिस्तानी शासन को आज आतंकवादियों व कट्टरपंथियों के समक्ष नतमस्तक होना पड़ रहा है। खतरनाक रूप से बिल्कुल पाकिस्तान की तरह हमारी अपनी जमीन पर भी आतंकवाद का उद्भव हो चुका है। पुणे बम विस्फोट कांड को अंजाम देने वाले हाथ 26/11 के उलट आयातित नहीं थे। कट्टरतावाद के नारे से दिग्भ्रमित कुछ स्थानीय मस्तिष्क ने उन्हें अंजाम दिया। यह शुरुआत है। इन्हें बगैर विलंब के कुचल दिया जाए। और, साथ ही अमेरिका संबंधी उत्पन्न शंका का निवारण भी तत्काल हो। विश्व के सबसे बड़े आतंकी हमले 9/11 की घटना के बाद का शांत अमेरिका और अशांत भारत-पाकिस्तान की गुत्थी तो सुलझानी ही पड़ेगी।

2 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अपना घर ठीक नहीं करना चाहते. अंकल से शिकायत करते हैं. अंकल अपना फायदा देखेंगे कि हमारा.

गिरीश पंकज said...

aapka vishleshan bilkul sahi hai. amerika aur pakistaa aatankvaad ke prateek ban gaye hai. aapka number nahi hai, mere paas varanaa fon bhi karta.- 09425212720