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Monday, January 12, 2009

राहुल की 'ताजपोशी' करें, लेकिन ....!


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'रसोईघर' के 'बर्तन' आपस में टकरा कर विचित्र शोर पैदा कर रहे हैं. किसी कोने से 'राहुल-राहुल' की गूंज उठती है, तो किसी कोने से ''.... चुप, अभी नहीं....!'' कांग्रेस के घर से उठ रहा यह शोर चूंकि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जाकर टिक जाता है, देश की उत्सुकता स्वाभाविक है. कांग्रेस की संस्कृति से परिचित लोगों को इस पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ. वस्तुत: इस तरह के 'शोर' एक सोची-समझी रणनीति के तहत पैदा किए जाते हैं. ऐसे शोर से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आकलन के बाद 'नेतृत्व' संबंधित मुद्दे पर अंतिम फैसला लेता है. वह फैसला, जिसके बीजारोपण से शोर पैदा कर पार्टी एवं देश की नब्ज़ को टटोला जाता है.
देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में राहुल का नाम उछाल कर पार्टी नेतृत्व देश की प्रतिक्रिया जानना चाहता है. ठीक उसी तरह जैसे इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्वकाल में एक बार उनके मंत्रिमंडल के एक सदस्य वसंत साठे ने 'लिमिटेड डिक्टेटरशिप' (सीमित तानाशाही) का जुमला छोड़ा था. जब देश भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई, तब सुझाव को व्यक्तिगत बताते हुए साठे पीछे हट गए थे. इंदिरा गांधी के कहने पर ही 1982 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने हेतु 'बिहार प्रेस विधेयक' लाया था. वह इंदिरा गांधी का ही प्रयोग था, जिसकी सफलता के बाद पूरे देश में प्रेस के पैरों में बेडिय़ां बांधने की योजना बनाई गई थी. तब प्रेस व जनता सड़क पर उतर आई थी. अंतत: सरकार झुकी, विधेयक वापस हुआ.
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री की कुर्सी को लेकर पिछले उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के समय से ही ऐसा 'कांग्रेस प्रयोग' जारी है. स्वयं प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उत्तरप्रदेश की एक चुनावी सभा में घोषणा की थी कि ''राहुल देश के भविष्य हैं.'' लेकिन जब कुछ दिनों पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल का नाम उछाला, तब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अर्जुन के वक्तव्य को खारिज कर दिया गया. बल्कि कांग्रेस में अर्जुन विरोधी खेमा यह कहने से नहीं चूका कि राहुल गांधी की संभावना को धूल-धूसरित करने के लिए ऐसा 'कुटिल वक्तव्य' दिया गया है. 10-जनपथ की नाराजगी भी तब सामने आई थी. तब प्रणव मुखर्जी ने भी अर्जुन के वक्तव्य पर नाराजगी जाहिर की थी. लेकिन कांग्रेस की जारी नई संस्कृति अपने ही बड़े नेताओं के कपड़े उतारने से नहीं हिचकती.
प्रणव मुखर्जी का बयान आया कि ''राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे.... अपने पिता राजीव गांधी के पदचिह्नों पर चलेंगे.... जब प्रफुल्लकुमार महंत और अमर अब्दुल्ला कम उम्र में मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तब राहुल प्रधानमंत्री क्यों नहीं?'' क्या प्रणव ने अपनी मर्जी से ऐसा बयान दिया था? मैं मानने को तैयार नहीं. ये वही प्रणव मुखर्जी हैं, जिन्होंने राजीव गांधी की मृत्यु के पश्चात प्रधानमंत्री पद पर अपना दावा ठोका था- सोनिया के नाम का विरोध किया था! बात यहीं खत्म नहीं होती, प्रणव के बयान के एक दिन पूर्व कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी बयान दिया था कि राहुल गांधी शीघ्र ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं. पूर्व में अर्जुन सिंह के ऐसे बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले प्रणव-दिग्विजय को अचानक राहुल प्रधानमंत्री कैसे नज़र आने लगे? ध्यान रहे, अर्जुन के बयान के बाद स्वयं सोनिया गांधी ने राहुल की 'संभावना' पर जारी अटकलों पर यह कहकर विराम लगा दिया था कि ''वह अभी छोटा है.'' प्रणव के ताजे बयान में न केवल दो मुख्यमंत्रियों के कम आयु का होने पर जोर दिया गया है, बल्कि यह भी कहा गया कि राजीव गांधी 40 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे. निश्चय ही प्रणव की जुबान नहीं फिसल रही थी. अब प्रणव जब अपने बयान से पलट रहे हैं, तब कोई भी समीक्षक बेखौफ यह कह डालेगा कि प्रणव के दोनों बयान, वसंत साठे के बयानों की तरह 'प्रयोगवादी' हैं!
यहां तक तो ठीक है. मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि एक सौ करोड़ से अधिक की आबादी वाला भारत देश, एक पार्टी-विशेष के मुट्ठी भर चाटुकारों का सहज 'मस्खरी-स्थल' कैसे बन जाता है? विवेकशून्य तो कदापि नहीं है यह देश! भारतीय लोकतंत्र में शासन के हर दरवाजे पर कोई भी दस्तक दे सकता है- राहुल भी! किसी को आपत्ति नहीं होगी, आपत्ति के स्वर उठ रहे हैं, तो चाटुकारों की भाटगीरी पर! और फिर, लुका-छिपी का खेल तो सिर्फ बच्चों को ही शोभा देता है.

3 comments:

अनुनाद सिंह said...

भारत को धीरे-धीरे गुलामी से दूर ले जाना है, न कि गुलामी की ओर ! नेहरू परिवार के नाम से अब गुलामी की बू आ रही है। देश का प्रतिभाशाली युवा एक मद्धिम बुद्धि के 'अर्धविदेशी, अर्ध भारतीय' को स्वीकार नहीं सकता।

शाश्‍वत शेखर said...

आपने बहुत अच्‍छे ढंग से इसपर प्रकाश डाल। धन्यवाद आपका।

VICHAR said...

आपने बहुत अच्‍छे ढंग से इसपर प्रकाश डाल। धन्यवाद आपका।