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Friday, January 29, 2010

पद्मभूषण से 'उपकृत' एक दलाल!

किंवदंती बन चुके कुख्यात ठग नटवरलाल की आज बरबस याद आ रही है। जिन दिनों भारत विदेशी मुद्रा के घोर संकट के दौर से गुजर रहा था, नटवरलाल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को प्रस्ताव दिया था कि अगर सरकार उसके सभी अपराधों को माफ कर दे और अनुमति दे तब वह विदेशों में कुछ करतब दिखा भारतीय विदेशी मुद्रा कोष को भर देगा। जाहिर है प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ। आज नटवरलाल की याद आ रही है, भारतीय मूल के अमेरिकी होटल उद्योगपति संत सिंह चटवाल को पद्मभूषण से अलंकृत किये जाने के संदर्भ में। पूरे देश में बहस छिड़ी है कि लाखों-करोड़ों की ठगी का आरोपी, दीवालिया और झूठी जानकारी देने वाले को भारत सरकार ने पद्मभूषण जैसे पवित्र, बड़े सम्मान से सुशोभित कैसे किया। केंद्र सरकार चटवाल पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज कर रही है। भारत सरकार की सफाई किसी के गले नहीं उतर रही। बल्कि केंद्र सरकार ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। केंद्र सरकार का यह तर्क कि चटवाल अमेरिका में भारतीय हितों का प्रबल पैरोकार है, अनेक शंकाओं को जन्म देने वाला है। सरकार की ओर से यह सफाई कि चटवाल के खिलाफ अब भारत में कोई मामला दर्ज नहीं है, कानून उल्लंघन के नए दरवाजे खोलने वाला है। चटवाल अमेरिका में किन भारतीय हितों को अंजाम दे रहा है? भारतीय जनता पार्टी ने चटवाल को एक दलाल के रूप में निरूपित किया है। क्या केंद्र सरकार के पास इस आरोप का कोई जवाब है? हो ही नहीं सकता! जानकार इस बात की पुष्टि करेंगे कि जब अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा करार के मुद्दे को प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार के अस्तित्व को दांव पर लगाते हुए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्र बना लिया था, तब संत सिंह चटवाल ने अमेरिका में भारत की ओर से एक दलाल की ही भूमिका अदा की थी। बगैर मेहनताने के नहीं, उसे भारत सरकार की ओर से 'उपकृत' किया गया था। देशहित साधने के लिए प्रत्येक सरकार ऐसे कदम उठाती रहती है। कभी राजनयिक स्तर पर तो कभी निजी स्तर पर। लेकिन अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा करार में कोई देशहित निहित था, वह अभी भी विवादास्पद है। सच तो यह है कि चटवाल का उपयोग प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निहायत निजी तौर पर किया था। शायद प्रधानमंत्री इस बात से इंकार नहीं करेंगे कि चटवाल के साथ उनका निरंतर संवाद रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर उनसे सलाह लेते रहते हैं। दो व्यक्तियों के बीच निजी संबंधों पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। किन्तु, मामला जब देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा हो तब वह निजी नहीं होता। चूंकि चटवाल को पद्मभूषण सम्मान दिए जाने की सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई थी, निशाने पर प्रधानमंत्री तो आएंगे ही। देश किसी सरकार या किसी व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं है। निर्वाचित सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है। पद्म सम्मान पर विवाद पहले भी खड़े हुए हैं। किन्तु संत सिंह चटवाल के चयन ने पूरे के पूरे पद्म सम्मान को ही लांछित कर डाला है। एक ठग, एक दीवालिया, एक दलाल और एक झूठे को पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत कर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारत सरकार की ओर से दिए जाने वाले इस पवित्र सम्मान की मूल अवधारणा को तार-तार कर डाला है। देश के इतिहास में यह प्रकरण एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। भारत की आजादी के समय किसी ने ठीक ही कहा था कि एक समय ऐसा आएगा जब योग्यता-प्रतिभा हाशिए पर सिसकती मिलेगी और बिचौलिए अर्थात दलाल उपकृत होते रहेंगे।

8 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

दलालों की ही मौज है. कहीं भी देख लीजिये. किसान पच्चीस सौ रुपये कुंटल अरहर बेच सका और दलालों ने सौ रुपये किलो बेच दी.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अभी मैंने आपके कई लेख पढ़े, बहुत ही अच्छे व रोचक थे. आप बहुत अच्छा लिखते हैं. एक लेख में लिखी एक पंक्ति को लेकर आपसे विरोध जताना चाहता हूं. आपने लिखा है कि गनीमत हुई कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अमर सिंह की सीडी का प्रसारण रोक दिया गया. मैं आपसे प्रश्न करता हूं कि क्यों यह अच्छा हुआ? क्या इस देश के नागरिकों को यह हक नहीं है कि वे यह जान सकें कि जिस व्यवस्था में वह जी रहे हैं वह किस तरह के लोगों द्वारा चलाई जा रही है. समाज के सुन्दर चेहरों के पीछे किस हद तक बदसूरती छुपी हुई है. व्यवस्था को सुचारू ढ़ंग से चलाये रखने का ठेका लेने वाले कितने दागदार हैं. आप सीडी के प्रसारण रुकने को अच्छा मान सकते हैं लेकिन मैं इसे देश के वाशिंदों का दुर्भाग्य मानता हूं.

संजय तिवारी ’संजू’ said...

ok

संजय बेंगाणी said...

कमला शर्माजी से आपकी प्रशंसा सुनी थी. मगर तभी एक लेख पर हमारे विचार भिन्न दिखे. हाल में आपके लेखों से लगता है आपकी प्रशांसा करने वाले गलत नहीं है. अच्छा लिखा है. साधूवाद.

पद्म पुरस्कारों का स्तर इतना नीचे गिरा दिया गया है कि अब हर कोई इसे पाने का सपना देख सकता है. खाने को न दे सके सरकार मगर आम आदमी को पद्म तो दे ही सकती है.

ajeet said...

dalal to har jagho par lal hokar mal kama rha hai aur bholi bhali janta kangal ho rhi hai aise me aapki soch aapka likha kitno ke vicharo me pariwartan lata hai ye mayne rakhta hai vaise to mai aapka lokmat k samay se shagird hu hum bemetara cg se reporting karte the aur mujhe media me ruchi jagane me aapki sampadkiy ka bhut bada yogdan hai

अरूण साथी said...

यहां चोर ही सम्मानीत होते हैं और इन सम्मानों की हकीकत चटवाल के माध्यम से सामने आई। नेहरू जी ने नटवर लाल को मना कर दिया पर सोनीया की सरकार ने नटवर लाल को सम्मानीत कर दिया।

अरूण साथी said...

यहां चोर ही सम्मानीत होते हैं और इन सम्मानों की हकीकत चटवाल के माध्यम से सामने आई। नेहरू जी ने नटवर लाल को मना कर दिया पर सोनीया की सरकार ने नटवर लाल को सम्मानीत कर दिया।

Citizens For Democracy said...

Sant Singh Chatwal disgrace to Padma Bhushan Award to him by Zionist Indian government.

Sant Singh Chatwal is a remarkable success story of a con man; Teacher in 1970’s in Addis Ababa to a Power Broker in powers of corridors of the world’s oldest Democracy America and largest democracy India in 1990’s. The Chatwal charm extends to the head of the state President Clinton in America and every idiot in important ministry’s including the duped Prime Minister and President of India from all parties. Even Mr. Clean of Tony Rezko fame current President Obama could not say NO to Chatwal and has to give him the duplicate Keys of White House to him.

Chatwal’s remarkable journey is full of scandals starting with Canada . It was Ranbir Singh Dhanjal a resident of Canada who helped Chatwal in getting the immigration to Canada in 1975 and later on according to Dhanjal he lost his business and all the wealth mysteriously due to Chatwal. He also claims Chatwal still owes him money on account of bounced checks. Dhanjal still lives in Canada can be reached at 514 620 0599.

One thing is very interesting Chatwal’s business life from 1975 to early 1990’s; there are number of partners mysteriously majority of them died or became power less to testify against him according to Dhanjal. Even the 2 failed marriages of Chatwal’s elder & younger sons to prominent Indian families; the victims and their parents are afraid to say any thing about Chatwal, his sons, his wife and his financial scandals.

Zionist President/Attorney Clinton bailed out Indian Hotelier (Hotels with slush money from Indian Federal Ministers) Sant Singh Chatwal from Bank Frauds of more than $12 millions. In September 2000, Chatwal hosted a half-million dollar fundraiser at that Upper East Side penthouse for Hillary Clinton's Senate campaign. A few months later the FDIC abruptly settled the financial fraud case going on against Chatwal Since 1997, agreeing on Dec. 18, 2000, to let Chatwal pay $125,000 for the loans that it had said caused at least $12 million in losses. (closing hours of Bill Clinton Presidency, Bush had already been declared Elected)

Padma Bhushan has become a joke in India now. Zionist Christian Sonia Gandhi the Uncrowned Queen Ruler of India and her puppets at least could have read an article on Chatwal which appeared in Sep. 2007 in Washington Post. It looks like Zionist Clinton’s who helped Chatwal in India and USA to settle his cases of financial frauds done to Indian and American Banks; are behind this gimmick of giving Padma Bhushan to a racketeer Sant Singh Chatwal.

BJP who is raising objections to Chatwal getting Padma Bhushan; how come they are not afraid of their Zionist Masters who are behind this joke. BJP never raised any objections when on the request of Anil Ambani, Zionist gave 8 Oscars to Slum Dog Millionaires. Anil Ambani loves India his reason was he wanted to bring Bollywood to Hollywood so that Bollywood does not have to rely on Middle East . It is better to be under Zionist because when it comes to Zionist they are the rulers of Congress and BJP the 2 major political parties of India besides Anil’s Mulayam Samajwadi Party.

It looks like Zionist don’t think there is any difference between awarding 8 Oscars to a mediocre film Slum Dog Millionaires and a Padma Bhushan to a financial racketeer and a quasi criminal Sant Singh Chatwal.

Dave Makkar (USA) 973 416 1600

http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2007/09/02/AR2007090201436.html