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Saturday, June 12, 2010

... तो जनता सिखा देगी सबक!

चाटुकार नेता अब और 'कोरस' न गाएं। दिग्विजय सिंह, वसंत साठे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विशेष सचिव रह चुके पी.सी. अलेक्जांडर ने, संकेत में ही सही, यह स्पष्ट कर दिया कि राजीव गांधी के कहने पर ही मध्यप्रदेश के तब के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने वारेन एंडरसन को अमेरिका भगाया। इसके पहले मध्यप्रदेश के एक और अधिकारी आर.सी. जैन सार्वजनिक रूप से खुलासा कर चुके हैं कि अर्जुन सिंह ने मुख्य सचिव ब्रम्हस्वरूप को जो आदेश दिया था, वह राजीव गांधी के निर्देश पर और राजीव गांधी ने अमेरिका के दबाव में आकर निर्देश दिए थे। जैन ने यह खुलासा भी किया है कि तब अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एंडरसन के मामले में व्यक्तिगत रूप से सीधे हस्तक्षेप किया था। क्या यह बताए जाने की जरूरत है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी से बात की थी?
गांधी-नेहरू परिवार के कुछ अति वफादार अलेक्जांडर के इस खुलासे पर नाराज हैं! इन्हीं में से एक आर.के. धवन अलेक्जांडर के आरोपों को निराधार बता रहे हैं। एक पुरानी कहावत है कि 'बात उठेगी तो दूर तलक जाएगी।' धवन इसे न भूलें। इंदिरा गांधी की हत्या की जांच के लिए गठित कार्तिकेयन समिति की रिपोर्ट चाहे दबा दी गई हो, जिन लोगों को उक्त रिपोर्ट की जानकारी है वे धवन के कथित 'विश्वासघात' से परिचित हैं। उन्हें मालूम है कि जो आर.के. धवन इंदिरा गांधी के आशीर्वाद से उनकी छत्रछाया में 'शक्तिशाली' बने थे, उसी इंदिरा गांधी के साथ धवन ने क्या छल किया? आज धवन अलेक्जांडर के शब्दों का खंडन कर रहे हैं तो क्या आश्चर्य! जानकार पुष्टि करेंगे कि इंदिरा गांधी के समय में प्रधानमंत्री कार्यालय की छवि दागदार बनाने का 'श्रेय' आर.के. धवन के खाते में है। यह तो भारत देश है जहां आज भी तीन-तीन प्रधानमंत्रियों की मौत का सच दफन कर दिया गया। फिर एक अमेरिकी एंडरसन को बचा ले जाने संबंधी प्रधानमंत्री की मशक्कत पर परदा डालने का कृत्य कैसे नहीं दफन होगा? आज के चाटुकार नेता इसी मानसिकता के कारण पल-पल झूठ उगलते रहते हैं। लेकिन यह देश इतना भी अशक्त नहीं कि वह लोकतंत्र के नाम पर अत्याचार, भ्रष्टाचार के दोषियों को अनंतकाल तक बर्दाश्त करता रहे। सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। उसे सड़क पर निकलने भर की देरी है। अब प्रतीक्षा है अर्जुन सिंह के मुंह खोलने की? जिस दिन वे मुंह खोलेंगे, सच सामने आएगा और तब दूध का दूध, पानी का पानी स्वत: स्पष्ट हो जाएगा। यह देश भोपाल के हजारों अनाथ बच्चों, विधवाओं और अपंगों की छाती पर किसी को भी मूंग दलने की इजाजत नहीं देगा। एंडरसन को पुलिस के चंगुल से छुड़ा सुरक्षित अमेरिका भगाने के दोषी हर दृष्टि से देशद्रोही हैं। सत्ता के दुरुपयोग के अपराधी हैं ये। 15 हजार से अधिक लोगों के हत्यारे हैं ये। इनका अपराध अक्षम्य है। अगर सत्ता व कानून ने इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो निश्चय मानिए, जनता इन्हें सबक सिखाएगी।

3 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जनता क्या कर लेगी...सांपनाथ की जगह नागनाथ ले आएगी !

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

जनता के पास क्या हथियार हैं? शिक्षित किया नहीं गया? मतदान की प्रणाली दोषपूर्ण. मतदान अनिवार्य नहीं. क्या होगा, कुछ नहीं.

RAJNISH PARIHAR said...

कुछ नही होने वाला!!कांग्रेसी संस्कृति में यही सब तो होता है...अर्जुन सिंह काफी समय से हाशिये पर चल रहें है ,अब इस मौके का फायदा वे वापिस पार्टी में सक्रिय होने में करेंगे!धवन की बातें हर कोई जानता है !अब कोशिश ये होनी चाहिए की भोपाल पीड़ितों को यथोचित मुआवजा और न्याय मिले!एंडरसन हाथ आने वाला नहीं है...