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Saturday, June 12, 2010

राजीव का 'मेरा भारत महान'!

राजीव गांधी प्रतिपादित 'मेरा भारत महान' की आज बरबस याद आ रही है। सचमुच महान ही तो है यह लोकतांत्रिक भारत देश जहां का कानून मंत्री घोषणा करता है कि हजारों लोगों की मौत और लाखों लोगों के विकलांग हो जाने की त्रासदी के मामले को भारत की सर्वोच्च अदालत 'ट्रक दुर्घटना' में बदल देती है! और महानता यह भी कि सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अवकाश प्राप्त करने के बाद आरोपी कंपनी यूनियन कार्बाइड द्वारा स्थापित एक ट्रस्ट के आजीवन चेयरमन बन जाते हैं! कानूनमंत्री वीरप्पा मोइली यह बताने से भी नहीं चूकते कि सरकार ने सबकुछ ठीकठाक किया, ढिलाई अदालत ने बरती। शाबास भारत देश! शाबास कानून मंत्री!
अब थोड़ा आगे बढ़ें। यूनियन कार्बाइड के मामले में अदालती फैसला आने के बाद स्वयं राजीव गांधी कटघरे में हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस के अनेक बड़े नेता, राजीव गांधी के तत्कालीन विशेष सचिव, मध्यप्रदेश के तत्कालीन जिलाधिकारी-पुलिस अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी राजीव गांधी की संलिप्तता (वारेन एंडरसन को अमेरिका भगाने के मामले में) की पुष्टि कर रहे हैं। मैं यहां विपक्षी दलों की चर्चा नहीं कर रहा। अन्य लोगों के अलावा नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य और राजीव गांधी के मित्र अरुण नेहरू भी इस मत के हैं कि बगैर राजीव गांधी की जानकारी के एंडरसन अमेरिका नहीं भाग सकता था। महान भारत की गाथा यहीं खत्म नहीं होती। एक मंत्री हैं जयराम रमेश। भोपाल जाते हैं। वहां की मिट्टïी को हाथ में उठाकर प्रमाणपत्र देते हैं कि मिट्टïी तो स्वच्छ है, विषाक्त नहीं। भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों की आत्माओं को चिढ़ाते हुए रमेश परोक्ष में यूनियन कार्बाइड को आरोपमुक्त करते हैं। 25 वर्षों बाद जयराम रमेश का यह प्रमाणपत्र पूरे देश की समझ को मुंह चिढ़ा रहा है। काश कि जयराम रमेश 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में रात्रि व्यतीत कर रहे होते! तब शायद वे आज यूनियन कार्बाइड के पक्ष में प्रमाणपत्र देने के लिए मौजूद नहीं रहते। ये शब्द कड़वे लग सकते हैं किन्तु मैं मजबूर हूं। रमेश ने न केवल भोपाल गैस कांड के मृतकों की आत्माओं व अन्य पीडि़तों बल्कि पूरे देश का अपमान किया है। उन्हें क्षमा नहीं मिल सकती।
जरा रुकें। अभी बात खत्म नहीं हुई। राजीव गांधी के महान भारत की कथा अनंत है। आज जब पूरा भारत देश उक्त कांड से संबंधित खुलासे को लेकर (पढ़ें एंडरसन) उद्वेलित है, कांग्रेस दल विभाजित हो चुका है, विपक्ष आक्रामक मुद्रा में है, तब सत्ताशीर्ष के 3 स्तंभ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी व देश के 'भविष्य' शक्तिशाली राहुल गांधी मौन हैं। क्यों? राहुल अपने पिता का और सोनिया अपने पति का बचाव क्यों नहीं कर रही? ये मामले के प्रति असंवेदनशील तो हो नहीं सकते। फिर क्या कारण है? जाहिर है कि ये दोनों किसी विशेष अवसर की प्रतीक्षा में हैं। संभवत: अर्जुन सिंह के मुंह खोलने की। कांग्रेस की ओर से मांग भी हो चुकी है कि अर्जुन सिंह अपना मुंह खोलें। जिस दिन अर्जुन सिंह अपना मुंह खोलेंगे उस दिन महान भारत की 'महानता' में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। अर्जुन सिंह अगर सच उगलेंगे तब कांग्रेस के उस स्याह पक्ष की पुष्टि हो जाएगी जो भारत के अमेरिकी गोद में लेट जाने की चुगली कर रहा है। अर्जुन सिंह एक असली क्षत्रिय की तरह हीरो बन जाएंगे। अगर एक अवसरवादी राजनीति की तरह पलटी मारते हुए अर्जुन सिंह राजीव गांधी का बचाव कर देते हैं तब विपक्ष ही नहीं पूरा देश कांग्रेस के नाम पर मुंह चिढ़ाता मिलेगा। सत्तालोलुप और धनपिपासु के रूप में कांग्रेस और अर्जुन सिंह 'महान भारत' की विडंबना बन जाएंगे।

3 comments:

sanjukranti said...

MP me aarakchhan vistarikaran ke masiha...27 percent aarakchhan ke sutrdhar samanya varg ke pratapi dushman manniya Arjunsingh ki kismat jordar hai.. party ne to unhe puri tarah kinare kr hi diya hai.. ab congress aur gandhi parivar ka bhavishaya unki juba ke lachilepan pr nirbhar.. Kanoon mantri ko kya khe is hetu hindi ditionry me ktu vachan khojna hoga.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

desh ke saath dhokha kiya hai sabne

आचार्य जी said...

आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!