centeral observer

centeral observer

To read

To read
click here

Saturday, March 21, 2009

अहित नेहरू-गांधी वंश का !


अगर यह संयोग है तो है विचित्र. जिस दिन भारतीय थलसेना के भूतपूर्व उप सेनाध्यक्ष जनरल एस.के. सिन्हा राजीव गांधी पुत्र राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हैं, उसके दूसरे ही दिन एक सीडी के जरिए संजय गांधी पुत्र वरुण गांधी को मुसलमान विरोधी, कट्टर हिन्दू साम्प्रदायिक के रूप में पेश कर दिया जाता है. आनन-फानन में कांग्रेस की ओर से वरुण गांधी की गिरफ्तारी की मांग कर दी जाती है. अगर यह वंशद्वंद्व का कोई नया चेहरा है तो अत्यंत ही घिनौना है. भारत में 'वंशराज' का काला इतिहास सर्वविदित है. चाहे हिन्दू साम्राज्य के वंशजों का मामला हो या फिर मुगल साम्राज्य का. इतिहास चीख-चीख कर ईष्र्या-द्वेष, विश्वासघात और खून की चुगली करता मिलेगा. आजादी पश्चात भारत के राजनीतिक क्षितिज पर तेजी से उभर कर आए पंडित जवाहरलाल नेहरू के 'वंश' को लेकर अनेक किस्से हवा में तैरते मिलेंगे- विवादास्पद और संदिग्ध. लेकिन नेहरू अथवा नेहरू-गांधी परिवार की सफलता की अपनी गाथा है. आज जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी मौजूद तो नहीं हैं, किंतु सोनिया, राहुल तथा मेनका, वरुण परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. सोनिया-राहुल सत्ता के साथ हैं तो मेनका-वरुण विपक्ष के साथ. कांग्रेस तो अपने अस्तित्व के लिए इस परिवार पर
पूरी तरह आश्रित है. अवसरवादी व चाटुकार कांग्रेसी तो पार्टी का पर्याय नेहरू-गांधी परिवार को मानते हैं. विदेशी मूल आड़े आने के कारण सोनिया प्रधानमंत्री नहीं बन पाईं. पारिवारिक विवाद व प्रतिद्वंद्विता के कारण स्वयं इंदिरा गांधी ने संजय गांधी की विधवा मेनका को घर से बाहर निकाल दिया था. परिवार पर सोनिया का कब्जा बना रहा. आज जब पूरे देश की राजनीति अनिश्चितता के भंवर में हिचकोले खा रही है, सोनिया की सारी शक्ति वंश के शासन को कायम रखने और राहुल को मुखिया बनाने में लगी है. इस आकलन को कोई चुनौती नहीं दे सकता. ऐसे में राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा निरूपित किए जाने से पार्टी और राहुल के लिए असहज स्थिति तो पैदा हुई ही है. लेकिन इसकी भरपाई वरुण की छवि बिगाड़ कर कैसे हो सकती है? अगर कांग्रेस नेता एवं केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्ब्ल ने वरुण की गिरफ्तारी की मांग न की होती, तब इस शंका का जन्म ही नहीं होता. यह तो साफ है कि बगैर 'अनुमति' के सिब्बल वरुण की गिरफ्तारी की मांग नहीं कर सकते. क्या कांग्रेस वरुण को अपने नेतृत्व के लिए खतरा मानने लगी है? यह लोमहर्षक है. उधर वरुण गांधी ने सीडी प्रकरण को अपने विरुद्ध षडय़ंत्र करार दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि सीडी में न तो उनकी आवाज है और न ही उनके शब्द. उनकी इस जिज्ञासा में भी दम है कि पांच मार्च को दिए गए उनके कथित भाषण की सीडी 17 मार्च को क्यों जारी की गई? जनरल सिन्हा का वक्तव्य 16 मार्च को आया था. नेहरू-गांधी परिवार के आपसी द्वंद्व को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ कांग्रेस अपना अहित ही करेगी. यही तो अब तक होता आया है. ऐन आम चुनाव के मौके पर इस विवाद को सतह पर लाकर कांग्रेस और किसी का नहीं, हित भाजपा का कर रही है और अहित नेहरू-गांधी वंश का.
19 मार्च 2009

1 comment:

vishwajeetsingh said...

नेहरू-गांधी खानदान वास्तव में गयासुद्दीन का खानदान हैं , अपने नीजि स्वार्थ की पूर्ति हेतु राष्ट्रहित को दाव पर लगा देना इस खानदान की विशेषता रही हैं ।
गौहत्या पर प्रतिबंध के खिलाप गांधी - नेहरू परिवार
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com