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Tuesday, November 3, 2009

संभल जाएं अहंकारी राज ठाकरे!

लगता है राज ठाकरे अपना मानसिक संतुलन खोते जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक दर्जन उम्मीदवार चुन कर क्या आ गए, वे बब्बर शेर बन बैठे। बार-बार गुर्रा रहे हैं। इसके पहले कि इनकी गुर्राहट को 'खून' लग जाए, उन्हें पिंजरे में कैद कर देना चाहिए। समझ में नहीं आता कि बार-बार संविधान और देश के कानून को चुनौती देने वाला यह बाल ठाकरे का बिगड़ैल भतीजा आजाद कैसे घूम रहा है? राज ठाकरे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी संविधान के जिस प्रावधान के सहारे गुर्राते हैं, दूसरों को इस प्रावधान से वंचित क्यों करना चाहते हैं? राज ठाकरे तो बल्किइस स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर कानून की सीमा पार कर गए हैं। जबकि अन्य कानून के दायरे में शालीनतापूर्वक अपने संवैधानिक अधिकार की दुहाई देते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी के टिकट पर निर्वाचित अबू आजमी ने हिंदी में शपथ लेने की घोषणा कर कोई अपराध तो नहीं किया। विधानसभा की कार्य पुस्तिका की हिंदी में मांग कर भी आजमी ने संविधान सम्मत ही काम किया है। उन्होंने मराठी या किसी अन्य भाषा का अपमान तो नहीं किया? हिंदी देश की राजभाषा है। राज ठाकरे या कोई अन्य इसे चुनौती देने की हिमाकत न करे। संविधान में स्पष्टत: उल्लेख है कि हिंदी सरकारी कामकाज की भाषा होगी। जब तक उसे पूर्ण राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक अंग्रेजी का सहयोगी भाषा के रूप में प्रचलन जारी रहेगा। बाद में क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान देते हुए प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की पहल पर त्रिभाषा फार्मूला लागू किया गया। क्षेत्रीय भाषाओं के अपने-अपने प्रदेशों में उपयोग की छूट दी गई। महाराष्ट्र में मराठी को वह दर्जा मिला। लेकिन प्रावधान के अनुरूप राजभाषा हिंदी और सहयोगी अंग्रेजी के उपयोग की बाध्यता मौजूद रही। ऐसे में अबू आजमी की हिंदी में शपथ लेने और हिंदी में ही 'एजेंडा' की मांग पूर्णत: संविधान सम्मत है। इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। राज ठाकरे का विरोध पूर्णत: संविधान विरोधी है। उनकी क्षेत्रीय, संकुचित मानसिकता का उदाहरण है ये। क्षेत्रीयता और भाषा के नाम पर महान महाराष्ट्र को देश की मुख्य धारा से अलग-थलग करने का षडय़ंत्र है यह। महाराष्ट्र की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। राज ठाकरे की यह चेतावनी कि अगर निर्वाचित सभी विधायकों ने मराठी भाषा में शपथ नहीं ली तब विधानसभा के अंदर उनके विधायक कुछ भी कर सकते हैं, सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था को चुनौती है- संविधान को चुनौती है। कुछ सीटों पर विजय के मद में राज इतने अहंकारी न बन जाएं कि लोग उन्हें पागल करार दे पागलखाने भेज दें। राज ठाकरे के मुंह से भाषा संबंधी निकली चेतावनी ने एक बार फिर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की रिपोर्ट की याद दिला दी है। 90 के दशक में सीआईए ने अमेरिकी प्रशासन को एक रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में उन देशों के नाम थे, जिनके भाषा और क्षेत्रीयता के आधार पर टूट-बिखर जाने की संभावना थी। भारत का नाम उस सूची पर शीर्ष पर था। राज ठाकरे के रूप उक्त संभावना अगर देश के टूटने का कारण बनती है तब क्यों न समय रहते उसे समाप्त कर दिया जाए? बेहतर हो, राज ठाकरे संभल जाएं। देश इतना कमजोर नहीं कि उनके ईंट, पत्थरों से डर जाएगा। रही बात अहंकार की तो जब रावण का अहंकार नहीं टिक पाया तो राज ठाकरे किस खेत की मूली हैं?

3 comments:

RAJ SINH said...

टुच्चा सत्ता लोलुप भर है यह छोकरा . खुद के बच्चों को अंगरेजी स्कूल भेजता है मराठी की बात करता है .अनगढ़ अनपढ़ भावनात्मक बेवकूफ इसके साथ हैं . चाचा का नक्कल भर है. . लेकिन असली अपराधी कांग्रेस है जिसने अपने स्वार्थ के लिए इसे पला पोसा है ,और बढावा ही नहीं दिया ,मदद भी कर रही है इसकी गुंडागर्दी की .

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हम भारतीयों की मानसिकता कुछ इस प्रकार की है, कि हमारे सामने जब तक कोई समस्या विकराल रूप न धारण कर ले...तब तक हम लोग उसे गंभीरता से ले ही नहीं पाते हैं । इस मामलें में भी कुछ ऎसा ही हो रहा है.....

mehta said...

bharat me jab tak chuha sher na ban jaye use gambhirta se nhi liya jata

raj ne jab mns ka nirman kiya tab wo ek chuhe the lekin abb wo ek sher banane ki koshish kar rhe hai
abb unhe babar sher na bnakar unhe gidhar bna dena chahiye

ase log bharat ki akhndta par khtra hai

jai hind