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Saturday, November 14, 2009

आदर्श सचिन के मार्ग पर चलेंगे राज?

भारतीय राजनीति के सबसे बड़े मवाली के रूप में अपना नाम दर्ज करवा चुके राज ठाकरे अब क्या कहेंगे? मराठी माणुस की उनकी परिभाषा को प्रत्यक्ष रूप से चुनौती देते हुए विश्व क्रिकेट के बादशाह और हर भारतीय के लाडले सचिन तेंदुलकर ने साफ शब्दों में बता दिया कि 'मैं मराठी तो हूं, किंतु मुंबई पूरे भारत की है।' अर्थात, मुंबई किसी की बपौती नहीं। जब अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन ने यही बात कही थी, तब राज ठाकरे एवं उनके गुर्गे दोनों पति-पत्नी को 'मुंबई निकाला' पर आमदा हो गए थे। अब सचिन के खिलाफ राज ठाकरे कौन सी कार्रवाई करेंगे? उत्तर आसान है। राज ठाकरे की इतनी हिम्मत ही नहीं कि वे हर दिल अजीज सचिन तेंदुलकर के खिलाफ एक शब्द बोल भी सकें। वे अच्छी तरह जानते हैं कि सचिन तेंदुलकर के रक्षा-कवच के रूप में सिर्फ मुंबईकर ही नहीं, पूरा भारत खड़ा हो जाएगा। सचिन ने अपने मराठी होने पर गर्व की बात बिलकुल सही कही है। हर किसी को अपनी जन्मभूमि और मातृभाषा पर गर्व होता है। किंतु मातृभूमि भारत और राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान में कमी नहीं की जाती। सचिन तेंदुलकर खेल की दुनिया में युग-प्रवर्तक के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे भारत का नाम विश्व में रौशन किया है। राज ठाकरे इस महत्व को समझने की कोशिश करें। राजनीति को पेशा बनाने वाले राज गांठ बांध लें कि घृणा, जातीयता, धर्म, भाषा और क्षेत्रीयता की संकीर्ण राजनीति विघटन का आगाज है। इससे दूर रहना ही श्रेयस्कर होगा। पिछले दिन क्षेत्रीयता और भाषा के आधार पर मुंबई की सड़कों और विधानसभा के अंदर जहर पैदा कर उन्होंने राष्ट्रविरोधी ताकतों को (अनजाने में) ही मजबूत किया है। विभिन्न संस्कृति और भाषा वाले भारत देश की ताकत विविधता में एकता रही है। इसे तोडऩे की कोशिश को राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में रखा जाएगा। और किसी से नहीं तो अब कम से कम सचिन तेंदुलकर से राज ठाकरे प्रेरणा लें। वैसे महाराष्ट्र के अन्य युग पुरुष लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, वीर विनायक दामोदर सावरकर, काका कालेलकर, आदि के जीवन चरित्र पढ़कर भी राज ठाकरे आत्मशुद्धि कर सकते हैं। इन सभी महान पुरुषों ने क्षेत्रीयता से परे राष्ट्रीयता और राष्ट्रभाषा के रुप में हिंदी का समर्थन किया था। इन ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज कर ठाकरे स्वयं अपने और अपने समर्थकों के लिए राजनीतिक व सामाजिक इतिश्री को ही आमंत्रित करेंगे। युवा राज ठाकरे ऐसा न करें।

2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

प्रेरणा लेने का काम फिलहाल बंद है।

MANOJ KUMAR said...

यथार्थ लेखन।